Ek Jala Huaa Ghar

Iqbal Mazeed

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  • Year: 2009

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Amarsatya Prakashan

  • ISBN No: 9788188466696

एक जला हुआ घर
आज के पाठक को जिन चीज़ों को दुनिया में, अपने आसपास या अपने भीतर भी देखकर जो हैरत-सी होती है, यह उन्हीं हैरतों की कहानियाँ हैं।
साहित्य को इनसान से, समाज से, जीवन से, संस्कृति और राजनीति से नए संबंध स्थापित करने पर प्रगतिशील आंदोलन ने जो ज़ोर दिया था यह उन्हीं संबंधों द्वारा जीवन के सौंदर्य, उसकी उठान और उभार को समझने का एक प्रयास है।
कहानी का यथार्थ समाचार-पत्रों और अदालतों में प्रस्तुत किए गए यथार्थ से कैसे अलग होता है उसके लिए यह अंतर जानना, जो फिक्शन से जुड़ाव नहीं रखता, मुश्किल है। इसके अतिरिक्त कोई दावा करना या कहानियों से यह उम्मीद करना कि वह गलत होने वाली चीजों को ठीक कर देंगी, मूर्खता है; क्योंकि हर चीज़ साहित्य से ठीक नहीं की जा सकती। देखना यह होगा कि साहित्य, जिसका आधार Joy of understanding होता है, ये कहानियाँ अपने पाठक को वह आनंद कितना दे पाने में समर्थ हैं और इस काम में लेखक की ओर से डंडी तो नहीं मारी गई है। अगर इन कहानियों में उस सुंदरता और शक्ति की खोज मिल जाए, जिनको नए सांस्कृतिक मूल्यों में स्थान मिल सके तो यह लेखन सफल है।

Iqbal Mazeed

इक़बाल मजीद
जन्म : 12 जुलाई, 1934, मुरादाबाद (उ० प्र०)
शिक्षा : एम.ए., बी.एड.
आकाशवाणी में सहायक केंद्र निदेशक के पद से सेवामुक्त
शिक्षा-दीक्षा और लेखन का प्रारंभ प्रगतिशील लेखन से जुड़कर लखनऊ से हुआ
चार कहानी-संग्रह और दो उपन्यास प्रकाशित
अंग्रेज़ी, रूसी, हिंदी, मराठी आदि में अनेक कहानियाँ अनुवादित एवं प्रकाशित। रंगमंच एवं दूरदर्शन के लिए नाटकों का लेखन एवं निर्देशन। अनेक अकादमियों एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत।

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