Paanch Absord Upanyas

Narendra Kohli

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Bhartiya Prakashan Sansthan

  • ISBN No: 9788188122523

पाँच एब्सर्ड उपन्यास
जब एक उपन्यासकार की कलम, कार्टूनिस्ट की दृष्टि पा जाती है तो एब्सर्ड उपन्यासों की रचना होती है । नरेन्द्र कोहली की इन पाँच रचनाओं में आपको उपन्यास का गठन, व्यंग्य-चित्रकार की पैनी दृष्टि, एक अनोखा अप्रस्तुत विधान, तीखा-करारा व्यंग्य तथा समकालीन जीवन की कुतर्कशीलता अपनी समग्रता में उपलब्ध होगी । सर्वथा नवीन कथ्य, शिल्प, शैली और विधा ! व्यंग्य-लेखन का एक सर्वथा नवीन आयाम ! इन रचनाओं में आपको व्यंग्य अपनी संपूर्ण गंभीरता में मिलेगा और आप समझ पाएँगे कि व्यंग्य हँसाने के साथ-साथ रुला भी सकता है, घावों को कुरेद भी सकता है और व्यक्ति को उसके आक्रोश का जीवन्त साक्षात्कार भी करा सकता है ।

Narendra Kohli

नरेन्द्र कोहली
नरेन्द्र कोहली अपने समकालीन साहित्यकारों से पर्याप्त भिन्न है । उन्होंने प्रख्यात कथाओं पर आधृत उपन्यास लिखे हैं, किंतु वे सर्वथा मौलिक हैं । वे आधुनिक हैं, किंतु पश्चिम का अनुकरण नहीं करते। भारतीयता की जडों तक पहुँचते हैं, किंतु पुरातनपंथी नहीं हैं ।
1960 ई० में नरेन्द्र कोहली की कहानियाँ प्रकाशित होनी आरंभ हुई थीं । 1965 ई० के आसपास वे व्यंग्य लिखने लगे थे । हिंदी का व्यंग्य साहित्य इस बात का साक्षी है कि अपनी पीढ़ी में उनकी-सी मौलिकता, प्रयोगशीलता, विविधता तथा प्रखरता और कहीं नहीं है ।
नरेन्द्र कोहली ने राम-कथा से सामग्री लेकर चार खंडों में एक बृहदाकार उपन्यास लिखा 'अभ्युदय' । किसी भी भाषा में संपूर्ण राम-कथा पर लिखा गया यह प्रथम उपन्यास है ।
'अभिज्ञान' कृष्ण-कथा से संबंधित है । कथा राजनीतिक है । निर्धन और अकिंचन सुदामा को सामर्थ्यवान श्रीकृष्ण सार्वजनिक रूप से अपना मित्र स्वीकार करते हैं, तो सामाजिक, व्यवसायिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सुदामा की साख तत्काल बढ़ जाती है ।
नरेन्द्र कोहली ने महाभारत-कथा की सामग्री से अपने उपन्यास 'महासमर' की रचना की । उन्होंने जैसे महाभारत को अपने युग में  पूर्णतः जीवंत कर दिया । उन्होंने अपने इस उपन्यास में जीवन को उसकी विराटता के साथ अत्यंत मौलिक ढंग से प्रस्तुत किया है ।
पिछले दस वर्षों में लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित करने वाली रचना 'तोड़ो, कारा तोड़ो' नरेन्द्र कोहली की नवीनतम उपन्यास-श्रृंखला है, जिसका संबंध स्वामी विवेकानंद की जीवन-कथा से है । स्वामी विवेकानंद का जीवन निकट अतीत की घटना है । उनके जीवन की प्राय: घटनाएं सप्रमाण इतिहासांकित है । यहां उपन्यासकार के लिए अपनी कल्पना अथवा अपने चिंतन को आरोपित करने की सुविधा नहीं है । उपन्यासकार को वही कहना होगा, जो स्वामी जी ने कहा था । अपने नायक के व्यक्तित्व और चिंतन से तादात्म्य ही उसके लिए एकमात्र मार्ग है ।

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