Yugdhvani

Bal Swaroop Raahi

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  • Year: 2011

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9789381467091

लोकप्रियता की युगधवनि
बालस्वरूप राही की ये कविताएं उस यादगार दौर की कविताए हैं, जब कविता के पाठक तथा श्रोता रसज्ञ तथा संवेदनशील हुआ करते थे और युवक-युवतियों में विशेष रूप से कविता के प्रति गहरा लगाव होता था। इन कविताओं को पढ़-पढ़ कर प्रौढ़ता की ओर अग्रसर हो रहे कविता-प्रेम भी पुन: युवा को जाया करते थे। आज को लगभग पांच दशक पहले भी राही की रुबाइयों, ग़ज़लों, गीतों तथा लम्बी कविताओं में यही खूबी थी। इन पंक्तियों के लेखक ने वह ज़माना देखा है, जब मंच से सुनाए जाने पर ये कविताएं श्रोताओं के मन-प्राण पर अंकित हो जाया करती थीं और उन की डायरियों में दर्ज हो जाती थीं। घनघोर रूप से पसन्द की जाने वाली उन की अनेक कविताएं देश- भर में काव्य-प्रेमियों को कंठस्थ है ।
प्रसन्नता की बात है कि राही की ऐसी विविध आयामी परम लोकप्रिय कविताएं, जो अब तक उन के किसी संकलन में नहीं आई थीं और कविता-प्रेमियों  द्वारा जिन के प्रकाशन की मांग निरन्तर की जा रही थी, अब पुस्तकाकार प्रकाशित हो रही हैं।
देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओँ में एक के बाद एक प्रकाशित होने वाली ये अविस्मरणीय कविताएं न केवल राही की लम्बी सार्थक काव्य-यात्रा में मील के पत्थर के समान हैं, वरन् पिछले पांच दशकों में हिन्दी-कविता के बदलते रूप-रंग तथा मिजाज़ की भी पुख्ता पहचान कराती हैं।
राही का यह अनूठा काव्य-संकलन 'युगध्वनि' हिन्दी कविता की लोकप्रियता के इतिहास को समझने के इच्छाओं तथा काव्य-प्रेमियों के लिए सचमुच एक तोहफे के समान है।

Bal Swaroop Raahi

बालस्वरूप राही
जन्म : 16 मई, 1936
जन्म-स्थान : तिमारपुर, दिल्ली
शिक्षा : एम०ए० (हिंदी), दिल्ली विश्वविद्यालय
आजीविका : दिल्ली विश्वविद्यालय में टयूटर, 'सरिता' में अंशकालिक कार्य, 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' में सह संपादक (1960-1978), 'प्रोब इंडिया' (इंग्लिश) के संपादक, भारतीय ज्ञानपीठ में सचिव ( 1982- 1990), महाप्रबंधक (हिंदी भवन) ।
प्रकाशन : मेरा रूप तुम्हारा दर्पण, जो नितांत मेरी हैं, जिद बाकी है (गीत-संग्रह), राग-विराग (हिंदी का प्रथम ओपेरा), हमारे लोकप्रिय गीतकार : बालस्वरूप राही ( डॉ. शोरजंग गर्ग द्वारा संपादित), राही को समझाए कौन (ग़ज़ल-संग्रह) । बाल-गीत-संग्रह : दादी अम्मा मुझे बताओ, हम जब होगे बड़े (हिन्दी व अंग्रेजी में) बंद कटोरी मीठा जल, हम सब से आगे निकलेंगे, गाल बने गुब्बारे, सूरज का रथ ।
कतिपय सामान तथा पुरस्कार : प्रकाशबीर शास्वी पुरस्कार, एन.सी.इं.आर.टो. का राष्टीय पुरस्कार, हिन्दी अकादमी द्वारा साहित्यकार सम्मान, अक्षरम् सम्मान, उदूभव सम्मान, जै जै वन्ती सम्मान, परम्परा पुरस्कार, दिल्ली प्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन समान, हिन्दू कालेज द्वारा अति विशिष्ट छात्र-सम्मान ।
विशेष : अनेकानेक कवि-गोष्ठियों, कवि-सम्मेलनों आदि में सक्रिय भागीदारी।  रेडियो, टीवी में अनेक कार्यक्रम।  'आकाशवाणी' से एकल काव्य-पाठ और 'साहित्य अकादेमी' में एकल काव्य-पाठ।  आकाशवाणी के सर्वभाषा कवि-सम्मेलन में हिन्दी का प्रतिनिधित्व (2003 ) । टीवी  तथा आकाशवाणी के अनेक वृत्तचित्रों, धारावाहिकों की पटकथा, आलेख तथा गीता संगीत नाटक विभाग के अनेक ध्वनि-प्रकाश कार्यक्रमों के लिए आलेख तथा गीता दूरदर्शन द्वारा कवि पर वृत्तचित्र प्रसारण । डीडी भारती पर अनेक बार प्रसारित 'गूंजते स्वर' (26 लोकप्रिय हिन्दी कवियों पर वृत्तचित्र) की परिकल्पना एवं आलेख।  संसदीय कार्यं मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य।

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