Teri Roshanai Hona Chahati Hoon

Alka Sinha

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  • Year: 2008

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788189859725

तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ
प्रतिष्ठित कवयित्री अलका सिन्हा की नवीनतम काव्यकृति 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' की पेम कविताएँ उस कोमल और अमूल्य अहसास की पावन कराती हैं, जिसका अभाव किसी को वहशी बना देता है तो किसी को संन्यासी । इन कविताओं में महानगरीय जीवन की आपाधापी के बीच एक भावात्मक विस्तार की अनुभूति होती है और यह विस्तार कहीं-कहीं तो दार्शनिकता पर जा टिकता है । इसीलिए पूरी कृति में बिखेरे प्रेम-प्रसंगो के वावजूद नितात निजी और आत्मीय क्षणों का यह अहसास कहीं भी छिछला या बेपर्दा नहीं होता । कवयित्री आम जिंदगी की मामूली घटनाओं को सरल और सधी भाषा में अपनी कविताओं में इस प्रकार गुंफित करती है मानो कविता की गलबहियां डाले कोई कहानी साथ-साथ चलती हो ।
ये कविताएं एक ओर प्रकृति में जीवन की अनंत संभावनाओं की तलाश करती हैं तो दूसरी ओर युगीन विषमताओं पर व्यंग्य भी कसती हैं । सामाजिक चेतना से संबद्ध एक स्वस्थ विमर्श इन कविताओं को लोकमंगल की भावना से जोड़ता है ।
हर किसी को अपनी-सी लगती ये कविताएं तमाम तनावों, परेशानियों और नाकामियों के बीच जीवन के प्रति आस्था और विश्वास जगाती है और आश्वस्त करती है कि सचमुच कीमती है हमारे बीच बची प्रेम की तरलता !

Alka Sinha

अलका सिन्हा
जन्म : 9 नवंबर, 1964, भागलपुर, बिहार ।
शिक्षा : एम०बी०ए०, एम०ए०, पी०जी०डी०टी०, केंद्रीय  अनुवाद ब्यूरो, गृह मंत्रालय द्वारा संचालित अनुवाद प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में रजत पदक ।
रचना-कर्म : 'काल की कोख से', 'मैं ही तो हूं ये', 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' (कविता-संग्रह) ० 'सुरक्षित पंखों की उड़ान', 'मुझसे कैसा नेह' (कहानी-संग्रह) ।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मानित विश्वविद्यालय, धारवाड़, कर्नाटक से 'सुरक्षित पंखों की उड़ान में स्त्री-विमर्श' पर शोध ०  प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूलों के हिंदी विषय के पाठ्यक्रम से कहानी शामिल ०  आकाशवाणी की विदेश प्रसारण सेवा द्वारा दर्जनों कहानियां नेपाली में अनूदित और प्रसारित ।
विशिष्ट गतिविधियाँ : केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रात्तय की हिंदीतर भाषी हिंदी लेखक पुरस्कार योजना में विशेषज्ञ के रूप से शामिल ०  अंतरराष्ट्रीय लेखन से जुडी हिंदी की साहित्यिक पत्रिका 'अक्षरम् संगोष्ठी' की सह-संपादक (मानद और अवैतनिक) ० दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम 'पत्रिका' को विशिष्ट श्रृंखलाओं की प्रस्तोता ०  गत तेरह वर्षों से गणतंत्र दिवस परेड का आंखों देखा हाल सुनाने का गौरव और राष्ट्रीय महत्त्व के अन्य कार्यक्रमों की रेडियों कमेंटेटर ० केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद की पूर्व साहित्य एवं संस्कृति मंत्री ।
सम्मान : कविता-संग्रह 'मैं ही तो हूं ये' पर हिंदी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा साहित्यिक कृति सम्मान (2002) ० संसदीय हिंदी परिषद द्वारा संसद के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान (2009) ०  कविता-संग्रह 'तेरी रोशनाई होना चाहती हूँ' पर परंपरा ऋतुराज सम्मान (2011) ० महात्मा फुले रिसर्च अकादमी, नागपुर द्वारा अमृता प्रीतम राष्ट्रीय पुरस्कार (2011) ०  विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर की सर्वीच्च मानद उपाधि 'विद्यासागर' (2011)

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