Ek Yug Ke Baad

Pushpa Rahi

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  • Year: 1994

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 6655424278499

एक युग के बाद
पुष्पा राही के गीतों में सुख-दुःख, आशा-निराशा, अन्धकार-प्रकाश, संयोग-वियोग, व्यथा-वेदना, मिथ्या मोह, दम्भ, पाखंड सबका वर्णन मिलता है । कुछ गीत इतने मार्मिक और हृदयस्पर्शी हैं कि उन्हें पढते समय जीवन के अनेक तथ्य नेत्रों के सामने उदघाटित होने लगते है ।
इन गीतो की एक विशेषता है नूतन बिम्बों का निर्माण । दर्द के मोती, रेशमी सुख, शोर की कालिख, उलझनों का झाड, नींद की कमजोर आँखे, विषमताएं रोग-सी, अंधेरे दर्द के साए, मीठी-मीठी इच्छा आदि प्रयोग गीत को संवेदन के स्तर पर बहुत मार्मिक बना देते हैं । कवयित्री अपनी अनुभूतियों और परिवेश की हलचल को ही लिखना चाहती है । दूसरों से उधार लेकर कुछ भी कहने में उसकी रुचि नहीं है ।
एक युग के बाद में संकलित गीत उच्चस्तरीय होने के साथ काव्य की भावभूमि पर अपनी छाप छोड़ते है । कोहरेभरे प्रभात से निकालकर चन्दन वन की शीतल छाया में हमें भ्रमण का अवसर देते हैं । प्यार के वृत्त में घुमते हुए हम सन्नाटे के पार पहुँच जाते है ।

Pushpa Rahi

पुष्या राही
जन्म : 8 मार्च, 1938 ।
जन्मस्थान : घुमान, जिला गुरदासपुर, पंजाब ।
शिक्षा : एम०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में ।
शोध-कार्य : 'छायावादी काव्य में अलंकार योजना' विषय पर पी-एच० डी० , दिल्ली विश्वविद्यालय; 'छायावाद और अंग्रेजी स्वछंदतावाद : समानान्तर भावभूमि एव कला प्रक्रिया' विषय पर डी० लिट्०, जम्मू विश्वविद्यालय ।
आजीविका : शिक्षण ।
लेखन : किशोरावस्था से ही काव्य-सृजन । अनेकानेक कविताएँ धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, कादम्बिनी, सरिता, मुक्ता, नवनीत सहित भारत की लगभग सभी प्रमुख पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित तथा अनेक प्रतिनिधि काव्य-संग्रहों में संकलित ।
साहित्यक गतिविधियाँ : अनेक कवि-सम्मेलनों, कवि- गोष्ठियों, परिचर्चाओं, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के कार्यक्रमों में भाग ।

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