Apna Raag

Pushpa Mehra

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 9788180631042

अपना राग
जिस युग में सब अपना-अपना राग आलापना चाह रहे हों, श्रीमती पुष्पा मेहरा का ‘अपना राग’ जितना उनका, उतना ही मेरा-आपका, बल्कि हम सबका राग है। उसके इस लक्षण की ओर आपका ध्यान अवश्य जाएगा कि भले ही वह रग-रग में समाया प्रतीत न हो, पर वह घुन की तरह भीतर पैठा रोग कदापि नहीं। 
पुष्पा मेहरा ने हिंदी कविता के समसामयिक मुहावरे को अपनाने या आधुनिकता की होड़ में शामिल होने की जगह अपने आसपास की दुनिया को ऐसी सीधी, सरल शैली में चित्रित किया है कि उनकी अनुभूति सहृदय पाठक को अपनी वह अनुभूति मालूम होगी, जिसे हम-आप व्यस्तता या लापरवाही के कारण भले लिपिबद्ध न कर पाएँ, किंतु पुष्पा मेहरा ने सँजोकर हमारे लिए सुलभ कर दिया है। यह कुछ-कुछ वैसा है, जैसे तड़क- भड़क-भरे माहौल में किसी का बिलकुल सीधे-सादे परिधान में प्रकट हो, कइयों को इस पछतावे से भर देना कि वे नाहक ही इतना सजे-सँवरे।
वैसे तो कविता के बहुतेरे प्रयोजन होते हैं–उनमें से एक यह भी कि वह जहाँ उपजे, उससे कहीं अन्यत्र उसकी शोभा झलके। आशा करनी चाहिए कि पुष्पा मेहरा की कविताएँ अंधी दीवार से टकराकर लौट आने वाली बंद कविताएँ होने के बजाय विभिन्न हृदयों में खुलने-खिलने वाली कविताएँ सिद्ध होंगी।

Pushpa Mehra

पुष्पा मेहरा
(सेवानिवृत्त अध्यापिका)
जन्म-तिथि : 12 दिसंबर, 1941
जन्म-स्थान : मौरावाँ, जिला उन्नाव (यू० पी०)
शैक्षिक योग्यता : एम० ए० (सोशोलॉजी, संस्कृत), बी० टी० 
अन्य जानकारी : प्रकाशित कविता ‘छलावा’ ‘गवाह’ पत्रिका में ०  सामाजिक 
स्तर पर प्रकाशित पत्रिकाओं में कविताएँ छपती रहीं ०  विद्यालय में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय व अंतर्क्षेत्रीय स्तर पर आयोजन समारोहों में कविता-पाठ प्रतियोगिताओं में भाग लेती रहीं ०  प्रथम व द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किए ०  शिक्षा विभाग द्वारा प्रकाशित पत्रिका में कविताएँ व निबंध छपते रहे।

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