Akkhar Kund

Padma Sachdev

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  • Year: 2002

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788170165170

अक्खर कुंड 
यूँ तो पद्मा सचदेव डोगरी की कवयित्री हैं, पर अनुवाद के माध्यम से जब वह प्रकट होती हैं , तो उनकी कविता में पूरे हिंदुस्तान की महक आती है । इससे सहज ही स्पष्ट हो जाता है कि वह संपूर्ण भारतीय समाज और संस्कृति को शब्द देने वाली कुशल कवियत्री हैं ।
पद्मा जी की कविता प्रकृति की कविता है और मनुष्य की संवेदना और करुणा की भी...। इनकी कविता में मिथकों की बानगी अदभुत और अलग पहचान से समृद्ध है । यहाँ वह सूक्ष्म में जाती हैं और उसे रूहानी भावों से जोड़ते हुए जो चित्रांकन करती है, वह जीवंत तो है ही, बल्कि अपनी जड़ों से जोडने का वास्तविक अहसास कराती हैं । इसलिए इनमें आत्मिक आनंद की अनुभूति भी है ।
पद्मा जी की कविताओं में कश्मीर का बेमिसाल सौंदर्य  तो है ही, वहाँ की जातीय संस्कृति का सबल रेखांकन  भी है, यानी इनमें कश्मीरियत समूचे आकार में यहीं होती है । इन्हें शब्द-चित्रों को बनाते हुए उन्हें घाटी में बारूद की गंध भी आती है । इससे उनका संवेदनशील मन विचलित होता है, लेकिन वह इसे यूँ ही नहीं छोड़ देतीं, पीड़ितों-वंचितों को आशा और विश्वास भेंटती है । उनमें 'एक दिन लौटने का अहसास' जगाती हैं ।

Padma Sachdev

पद्मा सचदेव 
जन्म : 17 अप्रैल, 1940, जम्मू
पिता प्रो० जयदेव शर्मा हिंदी-संस्कृत के विद्वान् थे । बचपन से ही उन्होंने पद्मा को श्लोक याद करवाए थे, जिनका वह बहुत स्पष्ट उच्चारण करती थीं । संस्कृत की लयात्मकता को गीतात्मकता और संस्कृत भाषा का सौंदर्य जैसे पद्मा की रूह में समा गया और सात वर्ष की छोटी उम्र में पिता का साया सिर से उठ जाने पर उनके भीतर जो खला पैदा हुआ उसे संस्कृत के शब्दों ने भरा और उसी में से कविता ने हृदय में घर कर लिया । डोगरी  लोकगीतों की अलौकिक डोर थामकर पद्मा  ने कविता के आसमान को छुआ । आज लोग इन्हें डोगरी की पहली कवयित्री के रूप में जानते हैं ।

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