23 Lekhikayen Aur Rajendra Yadav

Geeta Shree

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  • Year: 2010

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 9788190722131

23 लेखिकाएँ और राजेन्द्र यादव
अपने ढंग की अद्भुत पुस्तक है यह '23 लेखिकाएं और  राजेन्द्र यादव' । शायद किसी भी भारतीय भाषा में अकेली । इसे गीताश्री के पत्रकार-जीवन की एक उपलब्धि भी कह सकते  हैं । यहाँ गीता ने समय-समय पर लिखे गए समकालीन महिला-रचनाकारों के इम्प्रैशन (प्रभाव-चित्रों) का संयोजन किया है । कहीं ये साक्षात्कार हैं तो कहीं संस्मरण, कहीं राजेन्द्र जी के रचनाकार को समझने की कोशिश है तो कहीँ 'हंस' के संपादकीय, को लेकर उन पर बाकायदा मुकदमे । यहाँ अगर मन्नू भंडारी, मृदुता गर्ग, चित्रा मुद्गल, सुधा अरोडा, ममता कालिया, प्रभा खेतान, मैत्रेयी पुष्पा, अनामिका तथा कविता हैं तो निर्मला जैन, जयंती  रंगनाथन, पुष्पा सक्सेना, वीना उनियाल और रचना यादव भी अपने वक्तव्यों के साथ उपस्थित है । राजेन्द्र यादव अपने समय के सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार, नई कहानी आंदोलन के प्रमुख प्रवर्तक और कथा-समीक्षा के विलक्षण व्याख्याकार हैं । इधर चौबीस वर्षों में तो 'हंस' के तूफानी विचारों ने हंगामा ही खड़ा कर दिया हैं--राजेन्द्र जी को खलनायक और माफिया डॉन या पता नहीं और क्या-क्या बना दिया । विवादास्पद होना  जैसे उनकी स्थायी नियति है--'हंस' के माध्यम से उन्होंने स्त्री-दलित और अल्पसंख्यकों के पक्ष में जो जेहादी मुहिम चलाई है उसने निश्चय ही हिंदी के यथास्थितिवादी परंपरा-पोषकों की नींद हराम कर दी है । वे तर्क से नहीं, गालियों और आक्षेपों से राजेन्द्र जी के प्रश्नों का उत्तर देते हैं । मठाधीशों के लिए यह सचमुच बैचेन कर देने वाला सत्य है कि उनके देखते-देखते दलित और स्त्री-विमर्श आज साहित्य की केंद्रीय मुख्य धाराएँ हैं ।
राजेन्द्र यादव के इस विकट और अपने समय के सबसे जटिल व्यक्तित्व के विविध आयामों को समेटने की कोशिश करती हैं ये लेखिकाएँ गीताश्री के मंच से ।
किताबघर प्रकाशन की एक भव्य प्रस्तुति ।

Geeta Shree

गीताश्री
31 दिसंबर, 1965 को मुजफ्फरपुर (बिहार) में जन्म । राजनीतिक, सामाजिक, सिनेमा, साहित्य, कला-संस्कृति और स्त्री-संबंधी मसलों पर निरंतर लेखन । पहला कविता- संग्रह 'कविता जितना हक' हिंदी अकादमी के सहयोग से प्रकाशित । प्रिंट, टी०वी०, वेब पत्रकारिता के सभी माध्यमों पर गहरी पकड़ । भारतीय महिला पत्रकारों के प्रतिनिधि मंडल के साथ ईरान, चीन-तिब्बत, बेल्जियम, जर्मनी और लंदन की यात्राएँ ।
बचपन से ही साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी रुचि के कारण चुनौतीपूर्ण पत्रकारिता पेशे का चुनाव । 'स्वतंत्र भारत' (दिल्ली ब्यूरो), 'अक्षर भारत' (साप्ताहिक), 'रोजाना' (डी०डी० न्यूज), विश्व के प्रथम हिंदी पोर्टल 'वेबदुनिया डाट कॉम' से होते हुए फिलहाल 'आउटलुक' (हिंदी) में फीचर संपादक ।
मुजफ्फरपुर के साहित्य संस्कृति मंच 'साहित्य कुंज’ से सक्रिय भागीदारी । कुछ अलग करने की चाह के चलते अलग-अलग विषयों पर लिखने की ललक । इसी कड़ी में झारखंड तोर छतीसगढ़ राज्यों को लेकर 'आदिवासी महिलाओं की तस्करी' विषय पर अध्ययन के लिए वर्ष 2008 की नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया की सीरिया फेलोशिप ।
वर्ष 2008 में स्त्री-विमर्श संबंधी पुस्तक 'स्त्री आकांक्षा के मानचित्र' सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित ।
स्त्री-विमर्श पर देश की महत्वपूर्ण महिला लेखिकाओं के लेखों पर शीघ्र प्रकाशित पुस्तक का संपादन ।
राजस्थान के बँधुआ मजदूरों पर केंद्रित फीचर के लिए प्रेस इंस्टीट्यूट आँफ इंडिया द्वारा ग्रासरूट वेस्ट फीचर अवॉर्ड ।
फिल्म-लेखन के लिए मातृश्री अवॉर्ड ।
इलेवट्रॉनिक मीडिया में नियमित फिल्म समीक्षा ।
साहित्यिक, सांस्कृतिक, घरेलू हिंसा, निर्णय की स्वतंत्रता, स्त्री स्वास्थ्य, स्त्री रोजगार आदि विषयों के विश्लेषण एवं रिपोर्टिंग में विशेष रुचि ।

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