Davanal

Balshauri Reddy

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  • Year: 2004

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Himachal Pustak Bhandar

  • ISBN No: 9788188123582

दावानल
प्रस्तुत ऐतिहासिक उपन्यास पलनाडु-युद्ध पर आधारित है । पलनाडु जिला गुंटूर का एक प्रदेश है । यह युद्ध 12वी शती में पलनाडु के राजाओं के बीच राज्य बंटवारे का लेकर कारंपूडि रणक्षेत्र में हूआ था, जो आपस में भाई-भाई थे। इस युद्ध की तुलना महाभारत-युद्ध से की जाती है।  कुरुक्षेत्र की भाँति कारंपूडि रणक्षेत्र का भी सामरिक दृष्टि से उतना ही महत्त्व है । आंध्र के विद्वान् इसे 'पलनाडु महाभारत' की संज्ञा देने में संकोच नहीं करते । यद्यपि यह संग्राम आंध्र में घटित हुआ था, तथापि इसमें सार्वदेशिकता की झलक मिलती है। पलनाहु के इस युद्ध ने आंध्र के कवि, नाटककार, लेखक और इतिहासकारों पर ऐसा प्रभाव डाला कि इसे इतिवृत्त बनाकर उन्होंने दर्जनों काव्य,  नाटक, उपन्यास, वीर गीत, गद्य काव्य और गीति काव्य लिख डाले । साथ ही इस पर अनेक फिल्में भी बन गईं ।

(उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पुरस्कृत)

Balshauri Reddy

बालशौरि रेड्डी 
जन्म : 1 जुलाई, 1928, गोल्लल गुडूर, जिला कडपा, आंध्र प्रदेश
शिक्षा : नेल्लूर कडपा, वाराणसी, इलाहाबाद
मातृभाषा : तेलुगू
अन्य भाषाएँ : हिंदी, अंग्रेजी तथा तमिल का साहित्यिक ज्ञान
सेवाएँ : हिंदी प्रशिक्षण विद्यालयों में वर्षों तक प्रवक्ता (प्राध्यापक) तथा प्रिसिपल के पदों पर कार्य किया । दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के प्रकाशन विभाग में संपादन का कार्य । 25 वर्ष तक 'चंदामामा' के संपादक
पुरस्कार : 1956 में भारत सरकार के शिक्षा विभाग से इनके द्वारा रचित 'पंचामृत' पर पुरस्कार । उसी वर्ष उ०प्र० शासन ने उसी पुस्तक पर एक और पुरस्कार दिया । 1960 मेँ 'आंध्र-भारती' आलोचनात्मक ग्रंथ पर उ०प्र० शासन ने पुरस्कार दिया । 1966 में इनके मौलिक उपन्यास 'जिंदगी की राह' पर पुरस्कार दिया । 1966 में आंध्र प्रदेश साहित्य अकादमी, हैदराबाद ने इनके मौलिक स्तरीय सर्जनात्मक साहित्य-सृजन हेतु पुरस्कार प्रदान किया । जनवरी, 1976 में राष्ट्रभाषा परिषद, पटना ने अपने रजत जयंती उत्सव के अवसर पर 'धरती मेरी माँ' मौलिक उपन्यास को सम्मानित किया । उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 'शुभ निमंत्रण' (नाटक) तथा 'दावानल' (उपन्यास) पुरस्कृत । 16 अगस्त, 1983 को विहार सरकार के राजभाषा दिमाग ने सम्मानित किया । 1983 में ही तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित हुए।

स्मृति- शेष : 15 सितम्बर, 2015

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