Rachna Ka Jeevdravya

Jitendra Shrivastva

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  • Year: 2017

  • Binding: Hardback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-85-5

‘रचना का जीवद्रव्य’ इस दौर के महत्त्वपूर्ण कवि-आलोचक जितेन्द्र श्रीवास्तव की नई आलोचना पुस्तक है। इस पुस्तक की परिधि में आपातकाल के बाद की हिंदी कहानी का इतिहास है तो महापंडित राहुल सांकृत्यायन की अद्वितीय आत्मकथा का गहन विश्लेषण भी। इसमें मिर्ज़ा ग़ालिब हैं तो विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर भी। जितेन्द्र जिस बौद्धिक तैयारी, सहृदयता और संलग्नता से कविता पर विचार करते हैं, उसी बौद्धिक तैयारी, सहृदयता और संलग्नता से कथा साहित्य पर भी। वे आलोचना के औजारों को गड्डमड्ड नहीं करते। उनकी आलोचना में गहरी विचारशीलता है। जितेन्द्र श्रीवास्तव जब भी किसी विषय को उठाते हैं, उसे संपूर्णता में समझने-समझाने का उद्यम करते हुए उसे एक सर्वथा नई ऊंचाई भी देते हैं। यह अकारण नहीं है कि उनकी छवि एक विश्वसनीय आलोचक की है। वे भाषा की ताकत को जानते हैं इसलिए भाषिक पारदर्शिता के घनघोर आग्रही हैं। इस पुस्तक में संकलित आलेख भाषिक ताज़गी के अप्रतिम उदाहरण हैं। यह देखना सुखद है कि जितेन्द्र अपने पाठकों को उलझाते नहीं हैं। वे उन्हें वह मार्ग दिखाते हैं जो बिना किसी भटकाव के रचना के जीवद्रव्य तक ले जाता है। कहना न होगा कि जितेन्द्र श्रीवास्तव के बहुप्रशंसित और बहुउद्धृत आलोचनात्मक आलेखों की यह पुस्तक आलोचना के वर्तमान परिदृश्य को निश्चित रूप से संपन्न बनाएगी। 

Jitendra Shrivastva

जितेन्द्र श्रीवास्तव 
जन्म: उ.प्र. के देवरिया जिले की रुद्रपुर तहसील के एक गाँव सिलहटा में।
शिक्षा: बी.ए. तक की पढ़ाई गाँव और गोरखपुर में करने के बाद जे.एन.यू., नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए., एम.फिल. और पी-एच.डी.। एम.ए. और एम.फिल. में प्रथम स्थान।
प्रकाशित कृतियाँ: ‘इन दिनों हालचाल’, ‘अनभै कथा’, ‘असुंदर सुंदर’, ‘बिल्कुल तुम्हारी तरह’ (कविता-संग्रह) ० ‘भारतीय समाज की समस्याएँ और प्रेमचंद’, ‘भारतीय राष्ट्रवाद और प्रेमचंद’, ‘शब्दों में समय’, ‘आलोचना का मानुष-मर्म’ (आलोचना) ० ‘प्रेमचंद: स्त्री-जीवन की कहानियाँ’, ‘प्रेमचंद: दलित जीवन की कहानियाँ’, ‘प्रेमचंद: स्त्री और दलित विषयक विचार’, ‘प्रेमचंद: हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी कहानियाँ और विचार’ (सभी भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली से शीघ्र प्रकाश्य) (संपादन) ० भारतीय ज्ञानपीठ, नई दिल्ली से प्रकाशित ‘गोदान’, ‘रंगभूमि’, ‘धु्रवस्वामिनी’ की भूमिकाएँ लिखी हैं।
हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी में भी लेखन-प्रकाशन। कुछ कविताएँ अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, उड़िया और पंजाबी में अनूदित। लंबी कविता ‘सोनचिरई’ की कई नाट्य प्रस्तुतियाँ।
पुरस्कार-सम्मान: हिंदी अकादमी, दिल्ली का कृति सम्मान, उ.प्र. हिंदी संस्थान का रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार, भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार, उ.प्र. हिंदी संस्थान का विजयदेवनारायण साही पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता का युवा पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान और परंपरा ऋतुराज सम्मान।
जीविका: अध्यापन। कार्यक्षेत्र पहाड़, गाँव और अब महानगर। राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट, धारचूला (पिथौरागढ़), राजकीय महिला महाविद्यालय, झाँसी और आचार्य नरेन्द्रदेव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बभनान, गोण्डा (उ.प्र.) में अध्यापन के पश्चात् इन दिनों इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के मानविकी विद्यापीठ में अध्यापनरत।

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