Yatrayen (Paperback)

Himanshu Joshi

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  • Year: 2007

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-070-0

यात्राएँ
कहानियों, उपन्यासों की तरह हिमांशु जोशी के यात्रा-वृत्तांतों  की भी अपनी विशेषता है। पढ़ते-पढ़ते पाठक को कहीं लगने लगता है कि इन यात्राओं में लेखक के साथ-साथ वह भी यात्रा कर रहा है । लेखक जिस तरह से इन सबको देख रहा है, जिस तरह की अनुभूति उसे हो रही है, कुछ-कुछ वैसी ही उसे भी होने लगती है । सरलता, सहजता, स्वाभाविकता हिमांशु जोशी की रचनाओं के सहज, स्वाभाविक गुण हैं । संभवत: ये ही मूल गुण किसी रचना को जीवंत बनाने में सफल होते है ।
इन यात्राओं से कश्मीर के बर्फीले दुर्गम सीमा-क्षेत्र शामिल हैं तो पूर्व में बाँग्लादेश और भारत को विभाजित करती सुदूर हरित वंगा या इच्छामती के कूल-कगार भी । कहीं कन्याकुमारी तथा केरल की मनोरम हरित दुश्यावलियाँ हैं तो कुमाऊँ के पर्वतीय प्रदेश की अनेक अज्ञात, अछूती मनोरम झाँकियाँ भी। मॉरिशस का नीलवर्णी निर्मल स्वच्छ सागर है कहीं तो उत्तरी ध्रुव प्रदेश की हिमशीतल सफेद हवाएँ भी अपने अस्तित्व का अहसास जताने लगती है । हिमांशु जोशी संभवत: वह हिंदी के पहले लेखक है, जिन्होंने विश्वविख्यात नाटककार हैनरिक इब्सन के घर सीयन की साहित्यिक यात्रा की थी । उसी तरह नोबेल पुरस्कार से सम्मानित नार्वेजियन लेखक सीगरी उनसत तथा ब्यौर्नसन के घरों की तीर्थयात्राएँ भी।
ये यात्रा-विवरण मात्र यात्रा के विवरण ही नहीं, कहीं इनमें  इतिहास भी है, भूगोल के साथ-साथ साहित्य भी । कला एवं संस्कृति की मार्मिक छुअन भी। इसीलिए ये वृतांत कहीं  दस्तावेज भी बन गए हैँ-जीए हुए अतीत के। पाठको को इनसे एक संपूर्ण जीवन का अहसास होने लगता है। एक साथ वह बहुत कुछ ग्रहण करने में सफल होता है-शायद यह भी इन वृत्तात्तों की एक सबसे बडी सफलता है ।

Himanshu Joshi

हिमांशु जोशी
अग्रणी कथाकार
गत चालीस वर्षों से लेखन से सक्रिय
उपन्यास : कगार की आग ० अरण्य ० महासागर ० तुम्हारे लिए ० छाया मत छूना मन ० सु-राज ० समय साक्षी है
कहानी-संग्रह : अंतत: ० मनुष्य-चिह्न ० जलते हुए डैने ० इस बार फिर बर्फ गिरी तो आदि
कविता-संग्रह  : नील नदी का वृक्ष
यात्रा-वृतांत : यात्राएँ
भेटकर्ता : मेरे साक्षात्कार 
'यातना शिविर' में कालापानी की अनकही कहानी आदि विशेष चर्चित
समस्त भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त कुछ रचनाएँ अंग्रेजी, स्लाव, चेक, बर्मी, जापानी, चीनी, कोरियन, नार्वेजियन आदि में भी अनूदित हुईं । रंगमंच तथा चित्रपट के माध्यम से भी कईं कृतियों का प्रदर्शन हुआ । दूरदर्शन तथा रेडियों-धारावाहिक के रुप में भी ।
हिंदी अकादमी दिल्ली, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, बिदार राजभाषा द्वारा अनेक कृतियां सम्मानित । 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' (मानव संसाधन मंत्रालय) द्वारा 'गणेश शंकर विद्यार्थी सम्मान' से पुरस्कृत ।

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