Yajurveda : Yuvaon Ke Liye (Paperback)

Dr. Pravesh Saxena

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  • Year: 2014

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-89982-45-4

यजुर्वेद : युवाओं के लिए 

'वेद : युवाओं के लिए' ग्रन्थमाला की तीसरी पुस्तक 'यजुर्वेद : युवाओं के लिए' प्रस्तुत है । इसमें यजुर्वेद के 112 मन्त्रों को ऋग्वेद की तरह दस शीर्षकों के अंतर्गत समाहित किया गया है । ज्ञान-शिक्षा, स्वास्थ्य-योग, मानसिक स्वास्थ्य, धर्म-नैतिकता, अर्थ-धनैश्वर्य, घर-परिवार, समाज, राष्ट्र, पर्यावरण तथा वैश्विकता जैसे विषयों पर इन मन्त्रों के माध्यम से चर्चा हुई है । यजुर्वेद मुख्यतः कर्म से सम्बद्ध है । यह 'कर्म' यज्ञ है, जिसे यहाँ श्रेष्ठतम बताया गया है । पारम्परिक दृष्टि से 'यज्ञ' का सीमित अर्थ होता है — अग्नि में आहुति देना । परन्तु 'यज्ञ' का व्यापक अर्थ भी है, जहाँ समर्पण भाव मुख्य रहता है । अतः समाजोपयोगी सभी कर्म यघ के अंतर्गत आ जाते हैं । 
इन मन्त्रों ऐसा यघ, दीघार्यु व धन-सम्पति तथा सुरक्षादि पाने  प्रार्थनाएं हैं । क्रीड़ा, योगादि शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं । धर्म कर्तव्य तथा नैतिकता से जुड़ा है । यह लोभ प्रवृत्ति ही है, जिससे संसार में उपभोक्तावाद के बढ़ावा मिलता है । बल्ह के कारन एक ओर भय व आतंक पनपते हैं तो दूसरी ओर पर्यावरण प्रदुषण होता है । आधुनिक युग में यज्ञपरक जीवन परोपकार भावना से युक्त मानव-जनों की अपेक्षा है । शांति, विश्रांति और आनंद की चाह है सबको । वह कैसे मिले ? यही मंत्र निर्देश करते हैं । 'विश्व-शांति' के लिए किया जाने वाला 'शांतिपाठ' इसी वेद की देन है । 
यह पुस्तक उन सभी के लिए भी है, जो 'मन के युवा हैं' तथा प्राचीन ज्ञान को आधुनिक सन्दर्भों में समझना चाहते हैं । 

Dr. Pravesh Saxena

डा. प्रवेश सक्सेना
शिक्षा-दीक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से। सम्प्रति दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन पोस्ट ग्रेजुएट कालेज (सान्ध्य), नई दिल्ली में संस्कृत विभाग में रीडर-पद पर अध्यापनरत।
लेखन-कार्य
हिन्दी, संस्कृत, अंग्रेज़ी भाषाओं में। कविता, कहानी, लेख, शोधपरक लेखन, राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कविताओं, वार्ताओं आदि का रेडियो, दूरदर्शन पर प्रसारण। अनेक अखिल भारतीय सम्मेलनों एवं काव्यगोष्ठियों में सहभागिता। अन्तर्राष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलनों में शोध-पत्र प्रस्तुत। महाविद्यालयों, विद्यालयों, अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं में भाषण-व्याख्यान। कुछ वर्ष तक वेद संस्थान की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘वेद-सविता’ का सम्पादन।
प्रकाशित पुस्तकें
'Aditya From The Rigveda To The Upanisads’ ‘अनुभूति’, ‘राष्ट्रदेवता’ (संस्कृत कविता), ‘मरीचिका’, ‘अनुष्का’ (सम्पादित), ‘शब्दयायावर’, ‘हँसता-गाता बचपन’ (हिन्दी कविता), ‘संस्कृत, संस्कृति और पर्यावरण’, ‘वेदों में पर्यावरण संरक्षण’, ‘अवसाद से प्रसाद की ओर’ (वैदिक मनोविज्ञान), ‘अन्तिम प्रार्थना’ (मृत्यु सम्बन्धी विवेचन), ‘वैदिक वाङ्मय में प्राण’ (सम्पादित), ‘वेदों में क्या है?’, ‘भारतीय दर्शनों में क्या है?’, ‘श्रुतिनैवेद्यम्’, ‘नाट्यसूक्ति- समुच्चय’, ‘चाणक्यसूत्राम्’, ‘ऋग्वेद: युवाओं के लिए’, ‘सामवेद: युवाओं के लिए’ तथा ‘यजुर्वेद: युवाओं के लिए’।
पुरस्कार एवं सम्मान : दिल्ली संस्कृत अकादमी, इन्द्रप्रस्थ साहित्य भारती, भावना कला केन्द्रादि द्वारा, हिन्दी अकादमी द्वारा।

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