Vo Tera Ghar Ye Mera Ghar (Paperback)

Malti Joshi

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  • Year: 2016

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80048-99-4

वो तेरा घर, ये मेरा घर
इस बंगले के गृह-प्रवेश पर मां-पिताजी दोनो आए थे । बंगले की भव्यता देखकर खुश भी बहुत हुए थे, पर माँ ने उसांस भरकर कहा था, 'सोचा था, कभी-कभार छुट्टियों में तुम लोग आकर रहोगे, पर अब यह महल छोड़कर तुम उस कुटिया में तो आने से रहे।'
उन्होने कहा था, 'हम यहाँ भी कहाँ रह पाते है मां । नौकरी के चक्कर में रोज तो यहाँ से वहाँ भागते रहते हैं। यहाँ तो शायद पेंशन के बाद ही रह पाएंगे । मैं तो कहता हूँ आप लोग वह घर बेच दो । पैसे फिक्स डिपॉजिट में रख दो या लड़कियों को दे दो और ठाठ से यहाँ आकर रहो ।'
'न बेटे! मेरे जीते-जी तो वह मकान नहीं बिकेगा,' पिताजी ने दृढ़ता के साथ कहा था, 'हमने बड़े अरमानों से यह घर बनाया था । इसे लेकर बहुत सपने संजोए थे । अब वे सारे सपने हवा हो गए, यह बात और है।'
'ऐसा क्यों कह रहे है पिताजी । इस घर ने आपको क्या नहीं दिया ! हम सब इसी घर से पलकर बड़े हुए हैं। हम चारों की शादियां इसी घर से हुई हैं। बच्चों की शिक्षा- दीक्षा और शादियां—मां-बाप के यही तो सपने होते हैं ।'
'हाँ, यह भी तुम ठीक ही कह रहे हो । मैं ही पागलों की तरह सोच बैठा था कि यह घर हमेशा इसी तरह गुलजार रहेगा। भूल ही गया था कि लडकियों को एक दिन ससुराल जाना है । लड़कों को रोजगार के लिए बाहर निकलना है । और एक बार उड़ना सीख जाते है तो पखेरू घोंसले में कहाँ लौटते हैं। अब मुझें अम्मा-बाबूजी की पीड़ा समझ में आ रही है ।'
"कैसी पीडा?'
‘पाँच-पाँच बेटों के होते हुए अंत में अकेले ही रह गए थे दोनों । अम्मा तो हमेशा कहती थी, अगर मैं जानती कि पढ-लिखकर तुम लोग बेगाने हो जाओगे तो किसी को स्कूल नहीं भेजती । अपने आँचल से छुपाकर रखती ।'
और अपने अम्मा-बाबूजी की याद में पिताजी की आँखें छलछला आई थी ।
-[इसी संग्रह की कहानी 'साँझ की बेला, पंछी अकेला' से]

Malti Joshi

मालती जोशी

जन्म :  4 जून, 1934
शिक्षा : एम०ए० हिंदी, आगरा विश्वविद्यालय।

लगभग 35 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें दो मराठी कथा-संग्रह, दो उपन्यास, पाँच बाल-कथाएँ, एक गीत-संग्रह और शेष कथा-संग्रह सम्मिलित
हिंदी की लगभग सभी लब्धप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां एवं लघु उपन्यास प्रकाशित। करीब दो दर्जन कहानियों के रेडियो नाट्य रूपांतर दूरदर्शन पर कई कहानियों के नाट्य रूपांतर। जया बच्चन द्वारा सात कहानियों पर 'सात फेरे' सीरियल गुलजार द्वारा निर्देशित सीरियल 'किरदार' में दो कहानियों का समावेश। 'भावना' सीरियल में तीन कहानियों का प्रस्तुतिकरण।
अहिन्दीभाषी कथा-लेखिका के रूप में शिवसेवक तिवारी पदक, रचना पुरस्कार, कलकता 1983, मराठी कथा-संग्रह ‘पाषाया' के लिए महाराष्ट्र शासन का पुरस्कार सन् 1984, अक्षर आदित्य सम्मान, कला मंदिर सम्मान, मधुवन गुरुवंदना सम्मान, महिला वर्ष में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर सम्मान, म०प्र० के राज्यपाल द्वारा अहिंदीभाषी लेखिका के रूप में सम्मान (1985), म०प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन के 'भवभूति' अलंकरण से वर्ष 1998 में विभूषित । 

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