Vish Vansh (Paperback)

Rajesh Jain

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  • Year: 1999

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-459-3

विष वंश
कोई भी सफल नाटक अपने समय वा महाज्योति होता है, जिसके आलोक में राजसत्ता, जनसत्ता और मनुष्य की सामाजिक स्तरीयता आदि दीप्त होते हैं । नाटकों की रंग-परंपरा में राजा और राज्याश्रित कथा-परंपरा का सार्वकालिक योगदान संभवत: इसीलिए रहा है, क्योंकि राजा और प्रजा की कहानी इस धरनी से न कभी समाप्त होती है और न ही पुरानी पड़ती है । राजा- प्रजा की कहानी में मनुष्य के साथ जुडे तमाम आयाम- भेद-अभेद, नर-मादा, नेकी-बदी, योगी-भोगी, शिखर-घाटी अर्थात् सम्यक कथा-तत्त्वों एवं नाटकीय आरोह-अवरोहों का अवलोकन-परीक्षण। संभव हो पाता है ।
हिंदी के सुप्रतिष्ठित साहित्यकार राजेश जैन के इस प्रस्तुत नाटक 'विष वंश' में राजा की यह कथा हमारे आसपास के भ्रष्टाचार के जिस गहन सचिंतन से नंगा करती है, उसमें प्रतिपक्ष के लिए कोई अवकाश नहीं है । राजा अटपटसिंह और महामंत्री चंटप्रताप सिंह के माध्यम से तंत्र के भ्रष्टीकरण को, आज की नारी की अस्मिता क्या राजनीति में पनप राही वंशवाद को प्रवृति के साथ जोड़कर नाटककार ने इस नाट्यकथा को समकालीन समय का एक टकसाली पाठ बना दिया है । प्रजातंत्र ये प्रजा ही सर्वाधिक शक्तिशाली और सत्ताधीश हो-अत्यंत रोचक ढंग का यह सत्यान्वेषण इस नाटक के सुलझी हुई पहेली है ।
छठे 'आर्य स्मृति साहित्य समान' के निर्णायक मंडल- राम गोपाल बजाज, कन्हैयालाल नंदन तथा असग़र वजाहत जैसे नाट्यविदों के मूल्यांकन के आधार पर सम्मानित इस नाट्यकृति का प्रकाशन, नाटकों की दुनिया में एक सदाबहार खुशबू का आह्वान है, ऐसा विश्वास है ।

Rajesh Jain

राजेश जैन
जन्म : 16 जुलाई, 1949
शिक्षा : इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन
कृतियां : गीली धूप (उपन्यास); झूठे आकाश, बिके हुए
सन्दर्भ (कथा-संग्रह); रोशनी के खेतों में (कविता-संग्रह);
चिन्दी मास्टर, चिमनी चोगा, वायरस, कौयला चला हंस
की चाल, विष वंश (नाटक); ऊर्जा विहार (ललित
निबंध) एक पैसे की चिल्लर, नकली चाँद, साज
महल, कथा-वृक्ष, बडे से बडा, रहस्यों का सौदागर,
विस्फोट, रोबोकेट, इमारतों की चोरी (बाल-साहित्य)। 
पुरस्कार/सम्मान : हिंदी अकादमी, दिल्ली, म० प्र० साहित्य परिषद, भोपाल, ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार; चिल्ड्रेन्स बुक ट्रस्ट, नई दिल्ली; आर्य स्मृति साहित्य सम्मान. किंताबघर, दिल्ली; अनुपम बाल साहित्य पुरस्कार, अजमेर ।
टेलीविज़न : 'रजनी' सीरियल (एक कथा/पटकथा); चंदा-खोर (नाटक)।

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