Sachitra Yogasan (Paperback)

Om Prakash Sharma

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  • Year: 2012

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Arya Prakashan Mandal

  • ISBN No: 978-81-88118-90-8

भारत सदा से ऋषि-मुनियों, योगियों और दार्शनिकों का देश रहा है। यहां के निवासी सदा ही ज्ञान की खोज में लगे रहे हैं। आज नाना प्रकार की नई-नई सुविधएं मौजूद हैं, फिर भी व्यक्ति अधूरा, अतृप्त और अशांत है। उसका मन आज भी दुविधा में पड़ा है। नई पीढ़ी दिशाहीन हो गई लगती है। आत्महत्या करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अनेक भारतीय असफल रहकर पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति को अपनाते जा रहे हैं। वे भूल चुके हैं कि हम उन ऋषियों की संतान हैं, जिनके ज्ञान का डंका कभी पूरे विश्व में बजता था।
इस ऋषि-परंपरा में महर्षि पतंजलि का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिनके द्वारा प्रतिपादित योग-दर्शन के परिणामों को देखकर बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी स्तब्ध रह गए हैं।
महर्षि पतंजलि ने विश्व-भर के प्राणियों के जीवनकाल का अत्यंत सूक्ष्म अध्ययन करने के पश्चात् चैरासी लाख योगासनों का चुनाव किया और विकारों से बचकर सुखी एवं त्यागमयी जीवन जीने की विधि खोज निकाली।
योगासन के धीरे-धीरे अभ्यास से आप गंभीर बीमारियों से भी बच सकते हैं और स्वस्थ रह सकते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक महर्षि पतंजलि द्वारा निरूपित सिद्धांतों को नए रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है।

Om Prakash Sharma

ओमप्रकाश शर्मा
जन्म: 27 नवम्बर, 1932, दिल्ली।
शिक्षा: दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.कॉम. एवं एम.ए. (हिन्दी)।
योगदान: अनेक अंगरेजी पुस्तकों के हिन्दी अनुवाद और कई अन्य हिन्दी पुस्तकों का संकलन एवं सम्पादन।
प्रस्तुति: हस्तरेखाओं पर तीन विश्वप्रसिद्ध पुस्तकों का अनुवाद, जिनके लेखक हैं: सेंट जर्मेन, विलियम बैनहम तथा कीरो ०  एमिल लुडविग की पुस्तक नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी ०  प्रथम अश्वेत दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति नेलसन मैण्डेला की आत्मकथा ‘लांग वाक टु फ्रीडम’ का हिन्दी अनुवाद।
अन्य: उर्दू शायरी में विशेष रुचि तथा कुछ महत्त्वपूर्ण साहित्यिक ग्रंथों का प्रणयन।

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