Rigved, Harappa-Sabhyata Aur Sanskritik Nirantarta (Paperback)

Dr. Kripa Shanker Singh

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  • Year: 2007

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-89859-15-2

आज यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि ऋग्वेदिक संस्कृति हड़प्पा-सभ्यता के पूर्व की संस्कृति है । कितने वर्ष पूर्व की, यह कहना कठिन है; पर ऋग्वेद के वर्ण्य विषय को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हड़प्पा-सभ्यता (3000 ई.पू.) से कम से कम डेढ़ सहस्त्र वर्ष पहले से यह अवश्य ही विद्यमान थी । हड़प्पा-सरस्वती-सभ्यता से संबंधित स्थलों की खुदाइयों में इस तरह के प्रभूत प्रमाण मिले हैं, जिन्हें ऋग्वेदिक समाज की मान्यताओं और विश्वासों के पुनर्कथन के रूप में देखा जा सकता है और वही सांस्कृतिक ऋक्थ वर्तमान हिन्दू समाज का भी मूल स्वर है । उस ऋक्थ को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की जरुरत है । 
ऋग्वेद विश्व की प्राचीनतम साहित्यिक कृति भी है । उसमें अधिकाधिक ऐसा ऋचाएँ हैं, जो सर्वोत्कृष्ट काव्य के रूप में रखी जा रही जा सकती हैं । ऐसा ऋचाएँ भी हैं, जो शुद्ध रूप से भावनात्मक दृष्टि से कही गयी हैं और बहुत बड़ी संख्या में ऐसी ऋचाएँ भी हैं, जो प्रकृति के रहस्यमय दृश्यों के ऐन्द्रजालिक लोक में ले जाती हैं । 

Dr. Kripa Shanker Singh

प्रो. कृपाशंकर सिंह
शिक्षा:  लखनऊ विश्वविद्यालय, भाषाविज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय तथा पी-एच. डी. दिल्ली विश्वविद्यालय।
शोध और अध्यापन: शिकागो विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में कोर्कू--निहाल जनजाति की भाषा पर शोध।
दिल्ली विश्वविद्यालय में 37 वर्ष तक अध्यापन।
लेखकीय कार्य-क्षेत्र और कुछ कृतियाँ: ऋग्वेद--ऋग्वेद, हड़प्पा सभ्यता और सांस्कृतिक निरन्तरता; आर्य, ऋग्वेद और भारतीय सभ्यता; ऋग्वेद और भारतीय संस्कृति से सम्बन्धित अनेक लेख विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित स भाषाविज्ञान--Hierarchical Structure Of Bhojpuri–A Tagmemic Study, Lexical Borrowing In Nihali From Hindi And Marathi, Reading In Hindi-Urdu Linguistics (ed.), भाषाविज्ञान और भोजपुरी, आधुनिक भाषाविज्ञान (सहलेखन), हिन्दी की संरचना: कुछ पहलू (सम्पादित), भाषाविज्ञान तथा हिंदी भाषाविज्ञान से सम्बन्धित शोधपत्र लिंग्विस्टिक सोसाइटी  ऑफ इंडिया की शोध पत्रिका ‘इंडियन लिंग्विस्टिक्स’ तथा अन्य शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित स साहित्य--आधुनिक आलोचना बनाम शैलीविज्ञान, कविता के समानान्तर, हिन्दी रेखाचित्र, व्यावहारिक आलोचना (सहलेखन), साहित्य से सम्बन्धित अनेक लेख।
प्रकाशित ०  इतिहास--हिन्दी-उर्दू-हिन्दुस्तानी, हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता और अंग्रेजी राज 1800-1947, इतिहास का सच और हिन्दी-उर्दू तथा दक्खिनी हिन्दी, उर्दू और मुस्लिम राजनीति से सम्बन्धित लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

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