Rahiman Dhaaga Prem Ka (Paperback)

Malti Joshi

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  • Year: 2017

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Parmeshwari Prakashan

  • ISBN No: 978-93-80048-98-7

रहिमन धागा प्रेम का
"पापा, अगर आप सोच रहे है कि जल्दी ही मुझसे पीछा छुडा लेंगे तो आप गलत सोच रहे है । मैं अभी दस-बीस साल शादी करने के मूड में नहीं हूँ। मैं आपके साथ आपके घर में रहूंगी । इसलिए यह घर हमारे लिए बहुत छोटा है । प्लीज़, कोई दूसरा बड़ा-सा देखिए।"
"तुम शादी भी करोगी और मेरे घर में भी रहोगी, उसके लिए मैं आजकल एक बड़ा-सा घर और एक अच्छा सा घर-जमाई खोज रहा हूँ। रही इस घर की, तो यह तुम्हारी माँ के लिए है । यह जब चाहे यहीं शिफ्ट हो सकती है । शर्त एक ही है-कविराज इस घर में नहीं आएंगे और तुम्हारी माँ के बाद इस घर पर तुम्हारा अधिकार होगा ।"
अंजू का मन कृतज्ञता स भर उठा । उसने पुलकित स्वर में पूछा, "तो पापा, आपने माँ को माफ कर दिया ?"
"इसमें माफ करने का सवाल कहाँ आता है ? अग्नि को साक्षी मानकर चार भले आदमियों के सामने मैंने उसका हाथ थामा था, उसके सुख-दुःख का जिम्मा लिया था । जब उसने अपना सुख बाहर तलाशना चाहा, मैंने उसे मनचाही आज़ादी दे दी । अब तुम कह रही हो कि वह दुखी है तो उसके लौटने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया । उसके भरण-पोषण का भार मुझ पर था । गुजारा-भत्ता तो दे ही रहा हूँ अब सिर पर यह छत भी दे दी।"
[इसी संग्रह की कहानी "रहिमन धागा प्रेम का' से]

Malti Joshi

मालती जोशी

जन्म :  4 जून, 1934
शिक्षा : एम०ए० हिंदी, आगरा विश्वविद्यालय।

लगभग 35 पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें दो मराठी कथा-संग्रह, दो उपन्यास, पाँच बाल-कथाएँ, एक गीत-संग्रह और शेष कथा-संग्रह सम्मिलित
हिंदी की लगभग सभी लब्धप्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां एवं लघु उपन्यास प्रकाशित। करीब दो दर्जन कहानियों के रेडियो नाट्य रूपांतर दूरदर्शन पर कई कहानियों के नाट्य रूपांतर। जया बच्चन द्वारा सात कहानियों पर 'सात फेरे' सीरियल गुलजार द्वारा निर्देशित सीरियल 'किरदार' में दो कहानियों का समावेश। 'भावना' सीरियल में तीन कहानियों का प्रस्तुतिकरण।
अहिन्दीभाषी कथा-लेखिका के रूप में शिवसेवक तिवारी पदक, रचना पुरस्कार, कलकता 1983, मराठी कथा-संग्रह ‘पाषाया' के लिए महाराष्ट्र शासन का पुरस्कार सन् 1984, अक्षर आदित्य सम्मान, कला मंदिर सम्मान, मधुवन गुरुवंदना सम्मान, महिला वर्ष में स्टेट बैंक ऑफ इंदौर सम्मान, म०प्र० के राज्यपाल द्वारा अहिंदीभाषी लेखिका के रूप में सम्मान (1985), म०प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन के 'भवभूति' अलंकरण से वर्ष 1998 में विभूषित । 

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