Mere Jeevan Ka Prashasanik Kaal (Paperback)

Indira Mishra

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-82114-43-7

मेरे जीवन का प्रशासनिक काल
श्रीमती इंदिरा मिश्र के प्रशासनिक जीवन की इन स्मृतियों में एक नई वैचारिक ऊर्जा का समावेश निहित है। इस कृति से तथाकथित बहुप्रचलित ‘स्त्री-विमर्श’ की अवधारणा को, फिकरेबाजी से अलग, एक नया आयाम हासिल होता है कि वह मात्रा दलित या शोषित स्त्री का दायरा नहीं है, वरन् समाज में स्थापित कुशाग्र, प्रबुद्ध एवं सक्रिय स्त्री के अंतर्द्वंद्वों का भी प्रतिबिंब बन सकता है।
यूं डॉ. इंदिरा मिश्र रचनात्मक साहित्यिक लेखन में भी दखल रखती हैं, किंतु यहां अभिव्यक्ति के केंद्र में गहन मूल्यों की जगह प्रशासनिक तंत्र का ताना-बाना है--जो मुख्यतः सूचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक है--पर कहीं-कहीं ऐसे मानवीय प्रसंग और आख्यान भी अनायास मुखर हुए हैं--जिनमें सशक्त कथा साहित्य के गुण मौजूद हैं। लगता है ऐसे ही अनेक प्रसंगों से प्रेरणा लेकर लेखिका ने अपनी कहानियां गढ़ी होंगी, और जो शेष रह गए, उन्हें इस संस्मरण माला में यथावत् शामिल कर लिया।
प्रस्तुत पुस्तक में सिविल सेवा में प्रशिक्षणार्थी से लेकर राज्य के अपर मुख्य सचिव तक के अपने प्रशासनिक जीवन के जो कालखंड लेखिका ने शब्दस्थ किए हैं, उन्हें सुरुचिपूर्ण ढंग से क्रमबद्ध किया गया है।
विविध रुचि के समस्त पाठकों में यह कृति विशेषतः उन युवाओं (विशेषकर लड़कियों) के लिए ज्यादा सटीक है जो प्रशासनिक सेवा में अपना कैरियर बनाने का ध्येय रखते हैं।
--राजेश जैन

Indira Mishra

डॉ. इंदिरा मिश्र 
जन्म: 7 सितंबर, 1945
शिक्षा: बचपन में कनखल, उत्तराखंड में, श्री अरविंद आश्रम पांडिचेरी में तथा दिल्ली में (एम.ए. अंग्रेजी)।
शासकीय सेवा के दौरान: यॉर्क यूनिवर्सिटी, यू.के. (एम.ए. राजनीति), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल (पी-एच.डी.) तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (एल-एल.बी.)।
शासकीय सेवा: 1966 से 1968 दिल्ली के एक महाविद्यालय में व्याख्याता, 1968 में भारतीय राजस्व सेवा (आई.आर.एस.)।
1969 से 2005 तक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आई.ए.एस.) में मध्य प्रदेश में 20 वर्ष, भारत सरकार में (10 वर्ष) तथा छत्तीसगढ़ सरकार में (5 वर्ष), 
वर्ष 2005 में सेवानिवृत्त।
निजी क्षेत्र में सेवा: वर्ष 2005 से 2006 तक रायपुर के राय (निजी) विश्वविद्यालय में कुलपति (मनोनीत)
वर्तमान: समाज सेवा, संपादक: नवांकुर ;आध्यात्मिक विचारों तथा सकारात्मक सोच की मासिक पत्रिकाद्ध, स्वतंत्र लेखन, रायपुर के ‘देशबंधु’ दैनिक समाचार-पत्र में नियमित कॉलम लेखन, राज्य शासन को विभिन्न कार्यक्रमों में सहयोग।
प्रकाशित पुस्तकें: अब तक 11 (कविता, विविध विषयों पर ललित निबंध, वैचारिक निबंध तथा अनुवाद एवं 4 पुस्तकें विकासमूलक)

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