Kavi Ne Kaha : Kumar Ambuj (Paperback)

Kumar Ambuj

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  • Year: 2012

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-20-6

कवि ने कहा : कुमार अम्बुज 
मैं आधा-अधूरा जैसा भी हुं, एक कवि हूँ और बीत रही इस सदी का एक गवाह हूँ। मेरे सामने हत्याएं की गई है । मेरे सामने ही एक आदमी भूख से तब मरा है, जबकि मैं भोजन कर रहा था । एक स्त्री मेरी आँखों के सामने बेइज्जत की गई । मेरे गर्म बिस्तर से सिर्फ पचास मीटर दूर फुटपाथ पर लोगों ने शीत-भरे जीवन की रातें बिताई हैं । मुआवजा न मिलने से बरबाद हो गए लोगों ने जब सड़क पर जुलूस निकाला, मैं मदिरा पीता पाया गया । मैं चश्मदीद गवाह हूँ। मुझे गवाही देनी होगी । अभी न दूँगा तो अपने अंत में देनी होगी । इस गवाही से बचा नहीं जा सकता। इसी मायने में किसी कवि के लिए और किसी समाज के लिए कविता का रकबा महत्वपूर्ण है । कविता में लिखे शब्द, एक साक्षी के बयान हैं । अपने को सजदे से लाकर, झुककर, लिखे गए बयान । इन बयानो से कवि के अंतमू का और अपने समय के हालात का दूर तक पता चलता है । समाज के पाप और अपराध, एक कवि के लिए पश्चाताप, क्रोध, संताप और वेदना के कारण है । वह एक यूटोपिया का निर्माण भी है, जिसकी संभावना को असंभव नहीं कहा जा सकता ।

Kumar Ambuj

कुमार अम्बुज
जन्म : 13 अप्रैल, 1957, जिला गुना (म०प्र०) ।
प्रकाशित कृतियों : 'किवाड़' (1992), 'क्रूरता' (1996), 'अनंतिम' (1998), 'अतिक्रमण' (2002), 'अमीरी रेखा' (2011) (कविता-संग्रह) तथा 'इच्छाएं' (2008) (कहानी- संग्रह) प्रकाशित ।
हिंदी कविता के अनेक प्रतिनिधि संकलनों में कविताएं शामिल।  साहित्य की शीर्ष संस्थाओं में काव्यपाठ और व्याख्यान । कविताओं के अनेक भारतीय एवं अन्य भाषाओं में अनुवाद । कवि द्वारा भी कुछ चर्चित कवियों की कविताओं के अनुवाद प्रकाशित ।
सम्मान-पुरस्कार : कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, श्रीकांत वर्मा सम्मान, माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, केदार सम्मान और वागीश्वरी पुरस्कार ।

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