Kavi Ne Kaha : Bhagwat Ravat (Paperback)

Bhagwat Rawat

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  • Year: 2012

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-81467-22-0

कवि ने कहा : भगवत रावत
यह कविता पर निर्भर करता है कि वह अपने पाठक को कितनी देर अपने पास बिठाए रख सकती है, अथवा पहली बार के बाद दोबारा अपने पास बुलाने को कितना विवश कर सकती है। इस तरह कविता के पास जाने की पहल तो पाठक ही करता है। इसके बाद की जिम्मेदारी कविता पर आ जाती है कि वह कितनी अपने पाठक की हो पाती है। कितनी उसके अनुभव-संसार का रचनात्मक हिस्सा बन पाती है, जो सब कुछ छोड़कर कविता के पास कुछ पाने की गरज से आता है। 
समाज के जिस अनुभव-संसार में पाठक रहता है, उसी समाज से रचनाकार भी आता है। जीवन की तमाम अच्छाइयों, बुराइयों, समानता, असमानताओं, विसंगतियों और जटिलताओं आदि के बीच रचनाकार जो भी कुछ ऐसा देखता है जिसे प्राप्त भाषा के माध्यम से परिभाषित या अभिव्यक्त करना संभव नहीं होता, तो उसी प्राप्त भाषा को रचनाकार न, सिरे से गढ़ता है और उसके इस प्रयत्न का प्रतिफल ही उसकी रचना होती है।

Bhagwat Rawat

भगवत रावत
जन्म: 13 सितंबर, 1939, ग्राम टेहेरका, ज़िला टीकमगढ़ (म० प्र०)। 
शिक्षा: एम.ए., बी.एड.
प्रकाशित कृतियां: ‘समुद्र के बारे में’ (1977), ‘दी हुई दुनिया’ (1981), ‘हुआ कुछ इस तरह’ (1988), ‘सुनो हिरामन’ (1991), ‘अथ रूपकुमार कथा’ (1992), ‘सच पूछो तो’ (1996), ‘बिथा कथा’ (1997), ‘हमने उनके घर देखे’ (2001), ‘ऐसी कैसी नींद’ (2004), ‘निर्वाचित कविताएं’ (2004), ‘कहते हैं कि दिल्ली की है कुछ आबोहवा और’ (2007), ‘अम्मा से बातें और अन्य लंबी कविताएं’ (2008), ‘देश एक राग है’ (2009) (कविता-संग्रह); ‘कविता का दूसरा पाठ’ (1993), ‘कविता का  दूसरा पाठ और प्रसंग’ (2006) (आलोचना)।
सम्मान: दुष्यंत कुमार पुरस्कार, म.प्र. साहित्य परिषद् (1979), वागीश्वरी सम्मान, म० प्र०  हिंदी साहित्य सम्मेलन (1989), शिखर सम्मान, म० प्र० शासन, संस्कृति विभाग (1997-98), भवभूति अलंकार, म० प्र० हिंदी साहित्य सम्मेलन (2004)।
पंजाबी, मराठी, बंगला, उड़िया, कन्नड़, मलयालम, अंग्रेज़ी तथा जर्मन भाषाओं में कविताएं अनूदित।

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