Jeevan Hamara (Paperback)

Bebi Kambley

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  • Year: 2009

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-288-9

जीवन हमारा
मराठी लेखिका बेबी कांबले दलित साहित्य की प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं । दलित लोगों के विपन्न, दयनीय और दलित जीवन को आधार बनाकर लिखे गए इस आत्मकथात्मक उपन्यास ने मराठी साहित्य में तहलका मचा दिया था। महाराष्ट्र के पिछडे इलाके के सुदूर गाँवों में अस्मृश्य माने जाने वाले आदिवासी समाज ने जो नारकीय, अमानवीय और लगभग घृणित जीवन का जहर घूँट-घूँट पिया उसका मर्मांतक  आख्यान है यह उपन्यास । शुरु से अंत तक लगभग सम्मोहन की तरह बाँधे रखने वाले इस उपन्यास में दलितो के जीवन में जड़ें जमा चुके अंधविश्वास पर तो प्रहार किया ही गया है, उस अंधविश्वास को सचेत रूप से उनके जीवन में प्रवेश दिलाने और सतत पनपाने वाले सवर्णो की साजिश का भी पर्दाफाश किया गया है । इस उपन्यास को पढ़ना महाराष्ट्र के डोम समाज ही नहीं वरन् समस्त पददलित जातियों के हाहाकार और विलाप को अपने रक्त में बजता अनुभव करना है । शोषण, दमन और रुदन का जीवंत दस्तावेज है यह उपन्यास, जो बेबी कांबले ने आत्मकथात्मक लहजे में रचा है ।

Bebi Kambley

बेबी कांबले
मराठी साहित्य में दलित लेखन एक आन्दोलन भर नहीं है, वरन् एक विचार है । दबी-कुचली, पिछडी और सताई जा रही जमात के जीवन और संघर्ष, व्यथा और प्रतारणा  का बेबाक और धारदार शब्दों में रेखांकन करते हैं दलित लेखक नामदेव ढकाल, दया पवार और बेबी कांबले । बेबी कांबले इस धारा की एक प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं। वे इसलिए भी महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने जो कुछ सीखा है वह दलित जीवन की पाठशाला से ही सीखा है । औपचारिक शिक्षा से वंचित रहने के बावजूद बेबी कांबले के लेखन में जो वैचारिक धार है वह जिन्दगी के बीचोबीच खडे राष्ट्र रहने से मिली है । इसलिए यह अकारण नहीं है कि बेबी कांबले के इस आत्पकथात्मक उपन्यास ने छपते ही मराठी साहित्य में तहलका मचा दिया था । वयोवृद्ध लेखिका के इस उपन्यास से गुजरना हिंदी पाठकों के लिए एक रोमांचक और लोमहर्षक अनुभव होगा ।

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