Gulaha- E- Parishaan (Paperback)

Khursheed Nabi Abbasi

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  • Year: 2016

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-725-9

गुलहा-ए-परीशाँ 
एक जमाने में हर पढ़ा-लिखा काव्य-प्रेमी अच्छे-अच्छे और पसंदीदा अशआर को एक बयाज (संग्रह) रखता था, जिसमें दर्ज शेर जिंदगी की कशमकश, प्रतिकूल परिस्थितियों, सुख और दु:ख  क्षणों में उसे याद आते थे और उनको दोहराकर वह अपना दु:ख घटाता या सुख में वृद्धि कर लेता था ।  आज का जीवन व्यस्ततर है और हर व्यक्ति अस्तित्व के संघर्ष में ऐसा गूँथा हुआ है कि जिंदगी की लताफ़त अब उसे आकर्षित नहीं कर पाती । ऐसे में यदि काव्य-सागर के मंथन से निकले कुछ काव्य-रत्न उसे दिए जाएं तो वह अपनी जिंदगी को कटुता और वेदना में कुछ कमी महसूस कर सकता है । इसी विचार से प्रस्तुत संकलन में तीन सौ से अधिक विषयों पर कहे गए शेर एकत्रित किए गए हैं, जिनके साथ हमारे जीवन के अनेकानेक अनुभव जुड़े हुए हैं और यह कोशिश की गई है कि तवज्जो शाइर के नाम पर नहीं, उसके द्वारा किसी विषय विशेष पर रचे हुए शेर पर ही दी गयी है ।  शेर के चयन में रदीफ-क्राफिया, कल्पना-शक्ति, उपमा-अलंकार पर इतना बल नहीं दिया गया है, जितना शाइर की आत्मा की व्याकुलता या उसकी मनोदशा की तीव्रता को मद्देनजर रखा गया है।
उर्दू के सभी या अधिकतर शाइरों के प्रतिनिधि शेरों का यह संकलन अपने में एक अनूठा प्रयास है, जिसका हिंदी जगत् में निश्चय ही स्वागत किया जाएगा ।

Khursheed Nabi Abbasi

खुरशीद नबी अब्बासी
खुरशीद नबी अब्बासी का जन्म उत्तर प्रदेश के कस्बे अमरोहा में हुआ था । उनका सम्बन्ध एक ऐसे परिवार से है, जहाँ हमेशा से पढ़ने-लिखने की पुरानी परंपरा रही है । वैसे उन्हें घुट्टी में तो उर्दू पिलाई गई थी, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में रहने के कारण हिंदी की और प्रवृत्त हुए और यद्यपि कुछ लिखा तो नहीं, लेकिन शेर-ओ-शाइरी में लगाव होने के कारण उर्दू के सभी छोटे-बड़े शाइरों का कलाम पढ़ना और उनके उत्कूष्ट शेर चुनकर जमा करना उनका शौक बन गया ।
विगत चालीस वर्षों से कभी वे पुस्तक-व्यवसाय से जुड़े तो कभी फिल्मी दुनिया की खाक छानी और कई डायरेक्टरों के साथ असिस्टेंट रहे । रेडियों सीलोन और रेडियो एडवरटाइजिंग सर्विसेज़ में स्क्रिप्ट लेखन किया और अंत में फिर पुस्तक-प्रकाशन से जुड़ गए ।

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