Dus Pratinidhi Kahaniyan : Rabindra Nath Thakur (Paperback)

Rabindra Nath Thakur

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  • Year: 2013

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-81-7016-791-4

'दस प्रतिनिधि कहानियाँ' सीरीज़ किताबघर प्रकाशन की एक महत्त्वाकांक्षी कथा-योजना है, जिसमें हिन्दी कथा-जगत् के सभी शीर्षस्थ कथाकारों को प्रस्तुत किया जा रहा है ।
इस सीरीज़ में सम्मिलित कहानीकारों से यह अपेक्षा की गई है कि वे अपने संपूर्ण कथा-दौर से उन दस कहानियों का चयन करें, जो पाठको, समीक्षकों तथा संपादकों के लिए मील का पत्थर रही हों तथा ये ऐसी कहानियाँ भी हों, जिनकी वजह से उन्हें स्वयं को भी कहानीकार होने का अहसास बना रहा हो। भूमिका-स्वरूप कथाकार का एक वक्तव्य भी इस सीरीज़ के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसमें प्रस्तुत कहानियों को प्रतिनिधित्व सौंपने की बात पर चर्चा करना अपेक्षित रहा है ।
किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार रवीन्द्रनाथ ठाकुर के प्रस्तुत संकलन में जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'अनधिकार प्रवेश', 'मास्टर साहब', 'पोस्टमास्टर', 'जीवित और मृत', 'काबुलीवाला', 'आधी रात में', 'क्षुधित पाषाण', 'अतिथि', 'दुराशा' तथा 'तोता-कहानी'।
हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रवीन्द्रनाथ ठाकुर की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

Rabindra Nath Thakur

रवीन्द्रनाथ ठाकुर
जन्म : 7 मई, 1861
पिता : महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर

'भानुसिंहेर पदावली' ('भानु' का अर्थ सूर्य अर्थात रवि) नाम से भी 9 बरस की उम्र में पहली कविता ० अठारह वर्ष की उम्र में आध्यात्मिक अनुभूतियां ० 9 दिसंबर, 1883 को विवाह ० 41 बरस की उम्र में विधुर ० कुशल जमींदार का जीवन ० 21 दिसंबर, 1901 को शांतिनिकेतन में पाँच विद्यार्थियों का स्कूल खोला, जो आज अंतर्राष्टीय विश्वविद्यालय है ० नवंबर, 1907 में  प्रिय पुत्र शमीन्द्र की मृत्यु ० 'जन गण मन' राष्ट्रगान 1911 में लिखा ० बाँग्लादेश का राष्ट्रगान भी रवीन्द्रनाथ ने ही लिखा है ० दो देशों का राष्ट्रगान लिखने वाले कवि ० 27 मई, 1912 को इंग्लैंड की यात्रा के समय 'गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद ले गए ० विलियम बटलर यीटूस । गीतांजलि पर मुग्ध ० 19 नवंबर, 1912 को नोबेल पुरस्कार 'गीतांजलि' पर ० 6 मार्च, 1915 को शांतिनकेतन में गांधी से मुलाकात ० 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग कांड के विरोध में 'नाईटहुड' की उपाधि लौटाई ० चित्रकार, अभिनेता, कवि, उपन्यासकार, निबंधकार, नाटककार रवीन्द्रनाथ जादू भी जानते थे ०

7 अगस्त, 1941 को कोलकाता में 80 वर्ष की उम्र में देहांत।

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