Betava Bahati Rahee (Paperback)

Maitreyi Pushpa

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  • Year: 2016

  • Binding: Paperback

  • Publisher: Kitabghar Prakashan

  • ISBN No: 978-93-85054-67-9

बेतवा बहती रही
एक बेतवा! एक मीरा ! एक उर्वशी !
नही-नहीं, यह अनेक उर्वशियों, अनेक मीराओं, अनेक बेतवाओं की कहानी है ।
बेतवा के किनारे जंगल की तरह उगी मैली बस्तियों । भाग्य पर भरोसा रखने वाले दीन-हीन किसान । शोषण के सतत प्रवाह में डूबा समाज । एक अनोखा समाज, अनेक प्रश्नों, प्रश्नचिन्हों से घिरा ।
प्राचीन रूढियां है जहाँ सनातन । अंधविश्वास हैं अंतहीन । अशिक्षा का गहरा अंधियारा । शताब्दियों से चली आ रही अमानवीय यंत्रणाएँ । फिर जीने के लिए कोई किंचित ठौर खोजे भी तो कहाँ ! हाँ, इन अंधेरी खोहों और खाइयों में कभी-कभी मुट्ठी-भर किरणों के प्रतिबिंब का अहसास भी कितना कुछ नहीं दे जाता ।
उर्वशी का दु:ख है कि वह उर्वशी है । साधारण में भी असाधारण । इसीलिए सब तरह से अभिशप्त रही । तिल-तिल मिटती रही चुपचाप ।
प्रेम, वासना, हिंसा, घृणा से भरी एक हृदयद्रावक अछूती कहानी ! पूरे एक अंचल को व्यथा-कथा ।

Maitreyi Pushpa

मैत्रेयी पुष्पा
जन्म : 30 नवंबर, 1944, अलीगढ़ जिले के 'सिकुर्रा' गांव से
आरंभिक जीवन : जिला झाँसी के 'खिल्ली' गाँव में
शिक्षा : एम० ए० (हिंदी साहित्य) बूंदेलखंड कॉलेज, झाँसी
प्रकाशित रचनाएं : बेतवा बहती रही, इदन्नमम, चाक, झूला नट, अल्मा कबूतरी, विजन, अगनपाखी, कही ईसुरी फाग (उपन्यास); गोमा हंसती है, ललमनियाँ, चिन्हार (कहानी); कस्तूरी कुंडल बसै (आत्मकथा), खुली खिड़कियाँ (स्त्री-विमर्श)
- 'फैसला' कहानी पर टेलीफिल्म 'बसुमती की चिटूठी'
- 'इदन्नमम' उपन्यास पर आधारित साँग एंड ड्रामा डिवीजन द्वारा निर्मित छायाचित्र 'संक्रांति'
सम्मान-पुरस्कार : 'सार्क लिटरेरी अवार्ड' और 'द हंगर प्रोजेक्ट' द्वारा दिए गए 'सरोजिनी नायडू पुरस्कार' के अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक पुरस्कारों से सम्मानित

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